PNB की Currency Chest से मिले ₹17.29 करोड़ के नकली नोट, ₹4.36 लाख की कमी से NIA तक पहुंची जांच ।

By Bharat0KM | National Affairs | India

तिजोरी के अंदर का खेल: ₹4.36 लाख की गड़बड़ी से खुला ₹17.29 करोड़ के PNB नकली करेंसी कांड का राज ।

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की अत्यधिक सुरक्षित Currency Chest के भीतर से ₹17.29 करोड़ की नकली करेंसी मिलने के बाद बैंकिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला अब एक बड़े कथित अंदरूनी ऑपरेशन के रूप में सामने आ रहा है, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें बैंक अधिकारियों की कथित भूमिका, करोड़ों की संपत्तियों वाले संविदा कर्मचारियों और Currency Chest के अंदर की गतिविधियों से जुड़े CCTV फुटेज जैसे कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं।

₹4.36 लाख की गड़बड़ी से शुरू हुई पूरी कहानी

इस पूरे मामले का खुलासा किसी बाहरी खुफिया सूचना से नहीं, बल्कि एक मामूली दिखने वाली कैश शॉर्टेज से हुआ।

शुरुआती घटनाक्रम कुछ इस तरह सामने आया:

कैश भेजा गया: अगस्त 2026 की शुरुआत में सहारनपुर के PNB घंटाघर शाखा से नकदी की एक खेप जयपुर स्थित RBI Currency Chest भेजी गई।

गड़बड़ी मिली: खेप के जयपुर पहुंचने के बाद RBI ने करीब ₹4.36 लाख की नकदी कम होने की जानकारी दी।

आंतरिक ऑडिट: इस अंतर के बाद PNB मुख्यालय ने 9 अगस्त 2026 से सहारनपुर के Sophia Market स्थित Currency Chest का आंतरिक ऑडिट शुरू कराया।

लेकिन ऑडिट में सिर्फ रकम की कमी नहीं मिली। जांचकर्ताओं के सामने नकली नोटों का एक बड़ा भंडार आ गया।

शुरुआती जांच में ₹500 के नकली नोटों की 148 गड्डियां मिलीं, जिनका कुल अंकित मूल्य करीब ₹7.40 करोड़ था। इसके बाद नोटों की मशीनों से गिनती और सुरक्षा जांच आगे बढ़ी तो बरामद नकली करेंसी का कुल आंकड़ा बढ़कर ₹17.29 करोड़ तक पहुंच गया।

29 अगस्त को दर्ज हुई FIR, फिर NIA ने संभाली जांच

मामला 29 अगस्त 2026 को औपचारिक रूप से स्थानीय पुलिस तक पहुंचा। बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की शिकायत पर सहारनपुर के सदर बाजार थाने में मामला दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने FIR संख्या 0431/2026 दर्ज की। इसमें भारतीय मुद्रा की जालसाजी से संबंधित धाराएं लगाई गईं।

मामले की गंभीरता और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधों को देखते हुए जांच आगे बढ़ी। 3 सितंबर 2026 को NIA ने लखनऊ शाखा में RC-02/2026/NIA/LKW के रूप में मामला फिर से दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली।

इसके बाद जांच का दायरा सहारनपुर से बाहर निकलकर दूसरे राज्यों और संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंच गया।

बैंक के अंदर ही असली नोटों को बदलने का शक

जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी बैंक की सुरक्षित Currency Chest के अंदर पहुंची कैसे?

जांच में एक आशंका यह सामने आई है कि कई महीनों के दौरान Currency Chest से असली ₹500 के नोट निकाले गए और उनकी जगह उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोट रखे गए।

अगर जांच में यह आरोप साबित होता है, तो यह किसी बाहरी चोरी से ज्यादा गंभीर मामला होगा, क्योंकि इसका मतलब होगा कि बैंक के अंदर मौजूद सुरक्षा और custody व्यवस्था का इस्तेमाल करके रकम को बदला गया।

NIA की जांच में Currency Chest के CCTV फुटेज भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, फुटेज में वहां काम करने वाला पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार करेंसी बंडलों से नोट निकालते हुए दिखाई देता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का CCTV में नोट निकालते हुए दिखाई देना अपने आप में पूरी साजिश में उसकी भूमिका साबित नहीं करता। उसकी भूमिका, उद्देश्य और अन्य आरोपियों से संबंध जांच का विषय हैं।

₹111 करोड़ की कैश खेप भी जांच के दायरे में

जांचकर्ताओं की नजर 6 जुलाई को सहारनपुर से RBI भेजी गई करीब ₹111 करोड़ की करेंसी खेप पर भी है।

बताया गया है कि इस खेप में ₹500 के करीब 1,900 बंडल और ₹200 के करीब 800 बंडल शामिल थे।

NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी कैश मूवमेंट में नकली नोटों की मौजूदगी कब से शुरू हुई और करेंसी चेस्ट से बाहर भेजी गई रकम के रिकॉर्ड में क्या कोई असामान्यता थी।

इस जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नकली नोटों को बैंकिंग सिस्टम के भीतर किस चरण पर शामिल किया गया।

₹11 हजार की नौकरी, लेकिन करोड़ों की संपत्ति?

मामले में एक संविदा ड्राइवर-लोडर की आर्थिक स्थिति ने भी जांचकर्ताओं का ध्यान खींचा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस कर्मचारी की आधिकारिक मासिक आय करीब ₹11,000 थी। इसके बावजूद जांच में उसके नाम या नियंत्रण से जुड़ी कई संपत्तियों और वाहनों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

बताया गया है कि उसके पास:

– 5 मकान
– 1 SUV
– 1 सेडान कार
– 2 मोटरसाइकिल

जैसी संपत्तियां हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि वह अपने लिए वाहन चलाने के लिए एक अन्य निजी ड्राइवर को करीब ₹500 प्रतिदिन भुगतान करता था।

अब NIA इस बात की जांच कर रही है कि इन संपत्तियों का वास्तविक स्रोत क्या है और क्या उसका Currency Chest से जुड़े अधिकारियों के साथ कोई ऐसा संबंध था, जो कथित नकली करेंसी नेटवर्क तक पहुंच सकता है।

हालांकि, केवल किसी व्यक्ति की संपत्ति या जीवनशैली उसके अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसियों को संपत्ति के स्रोत और कथित अपराध के बीच ठोस संबंध स्थापित करना होगा।

जांच के घेरे में कौन-कौन?

मामले में कई बैंक कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।

नाम| पद| मौजूदा स्थिति
अमित कुमार| PNB Manager एवं Joint Vault Custodian| NIA ने 7 सितंबर को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया
रवि कुमार कांसे| Senior Divisional Manager| PNB द्वारा निलंबित; जांच के घेरे में
सुशील कुमार शर्मा| Currency Chest Manager| PNB द्वारा निलंबित; जांच के घेरे में
विशाल कुमार| Part-time Housekeeper| नौकरी से हटाया गया; FIR में नाम और जांच के दायरे में

NIA ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर जांच और तलाशी अभियान भी चलाया है। अधिकारियों की गतिविधियों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

एक ड्राइवर के कथित अपहरण ने भी बढ़ाई चिंता

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है।

Currency Chest से जुड़े एक अन्य ड्राइवर आदर्श के परिवार ने आरोप लगाया है कि बैंक से जुड़े कुछ लोगों ने उसे कथित तौर पर अगवा किया, ताकि वह जांच एजेंसियों के सामने कोई जानकारी न दे सके।

हालांकि यह फिलहाल परिवार का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। सहारनपुर के SP (City) व्योम बिंदल के हवाले से बताया गया है कि इस मामले में समानांतर अपहरण जांच भी चल रही है।

यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा सकता है।

अब नकली नोटों के स्रोत की तलाश

NIA की जांच अब केवल बैंक के अंदर तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ₹17.29 करोड़ की नकली करेंसी आखिर बनी कहां और Currency Chest तक पहुंची कैसे।

जांच एजेंसियां संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं। इनमें खास तौर पर नेपाल के रास्ते नकली भारतीय करेंसी की संभावित तस्करी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका की जांच शामिल है।

हालांकि, अभी तक नेपाल या किसी विदेशी नेटवर्क की भूमिका इस मामले में साबित नहीं हुई है। यह फिलहाल जांच की एक दिशा है।

आगे क्या?

सहारनपुर की इस Currency Chest से शुरू हुई जांच ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे अहम सवाल यही है कि ₹17.29 करोड़ के नकली नोट एक सुरक्षित बैंकिंग परिसर के अंदर पहुंचे कैसे?

क्या यह लंबे समय तक चलने वाला अंदरूनी नेटवर्क था? क्या असली नोटों को योजनाबद्ध तरीके से नकली नोटों से बदला गया? और अगर ऐसा हुआ, तो इस प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे?

NIA की जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है।

फिलहाल PNB अधिकारियों समेत जिन लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है, उनके खिलाफ लगे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। लेकिन ₹4.36 लाख की शुरुआती गड़बड़ी से शुरू हुई यह जांच जिस तरह ₹17.29 करोड़ की नकली करेंसी और संभावित अंदरूनी नेटवर्क तक पहुंची है, उसने पूरे मामले को देश के सबसे गंभीर बैंकिंग सुरक्षा मामलों में से एक बना दिया है।

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