बिहार में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड सहस्त्रलिंगम, 33 फीट ऊंचे शिवलिंग का 17 जनवरी 2026 को हुआ लोकार्पण।
पूर्वी चंपारण (बिहार)।बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित कैथवलिया, जानकी नगर में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में दुनिया का सबसे बड़ा अखंड सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी 2026 को विधिवत रूप से की गई, जिसके साक्षी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बने।
एक ही पत्थर से बना विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग इस विराट शिवलिंग की ऊंचाई 33 फीट, गोलाई 33 फीट और कुल वजन करीब 210 मीट्रिक टन है। इसे ब्लैक ग्रेनाइट के मोनोलिथिक (एकल) पत्थर से तराशा गया है। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक ही पत्थर से बिना किसी जोड़ के बनाया गया है, जो इसे दुनिया में अद्वितीय बनाता है।
1008 सहस्त्रलिंगम उकेरे गए ।
इस अखंड शिवलिंग पर 1008 सहस्त्रलिंगम अत्यंत बारीक और कलात्मक ढंग से उकेरे गए हैं। शिल्पकारों के अनुसार, एक ही पत्थर से इतने बड़े सहस्त्रलिंगम का निर्माण पहली बार किया गया है।
निर्माण में लगे करीब 10 वर्ष
भव्य शिवलिंग को तैयार करने में लगभग 10 वर्ष का समय लगा। निर्माण कार्य की शुरुआत बिहार धार्मिक न्यास परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य अशोक कुमार के मार्गदर्शन में कराई गई थी। शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम (पट्टिकाडु क्षेत्र) में किया गया।
2100 किलोमीटर की ऐतिहासिक यात्रा
निर्माण के बाद इस 33 फीट ऊंचे और 210 टन वजनी शिवलिंग को विशेष रूप से डिजाइन किए गए 96 पहियों वाले हाइड्रोलिक ट्रेलर से तमिलनाडु से बिहार लाया गया। यह यात्रा लगभग 2100 किलोमीटर लंबी रही और इसे पूरा करने में 20 से 25 दिन लगे।यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया और पूजा-अर्चना की गई। आधार पीठ और त्रिदेव स्वरूप विराट रामायण मंदिर परिसर में इस शिवलिंग को 36 फीट ऊंचे आधार पीठ पर स्थापित किया गया है। शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के प्रतीकात्मक भाग दर्शाए गए हैं।
क्रेन से हुआ स्थापना कार्य, CM रहे मौजूद
17 जनवरी को सुबह 10:45 बजे क्रेन के माध्यम से शिवलिंग को उठाकर आधार पीठ पर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो 11:57 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस पूरे क्षण को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे परिसर का निरीक्षण किया और मंदिर के प्रारूप को भी देखा। वैदिक विधि से हुआ पूजन शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व सुबह 8 बजे वैदिक विधि से पूजा संपन्न हुई। काशी (वाराणसी), मिथिला सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए चारों वेदों के विद्वान आचार्यों ने मंत्रोच्चारण किया।
ईशान संहिता के अनुसार शिवलिंग की उत्पत्ति और नरक निवारण चतुर्दशी के पावन अवसर पर सहस्त्रलिंगम की स्थापना के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।शिल्पकारों की टीम और नेतृत्व शिवलिंग निर्माण का नेतृत्व प्रसिद्ध शिल्पकार हेमलता देवी ने किया। उनके साथ शिल्पकारों की एक पूरी टीम ने वर्षों तक कठिन परिश्रम किया। इस कार्य में उनके पुत्र विनायक बैकट रमण की भूमिका भी अहम रही।
विराट रामायण मंदिर का भव्य स्वरूप इन्फोग्राफिक के अनुसार, विराट रामायण मंदिर का कुल क्षेत्रफल लगभग 120 एकड़ होगा। मंदिर की लंबाई 1080 फीट, चौड़ाई 540 फीट होगी। इसमें 18 शिखर, 22 मंदिर और मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट निर्धारित की गई है। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा वैश्विक पहचान दुनिया के सबसे बड़े अखंड सहस्त्रलिंगम की स्थापना के बाद बिहार को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह स्थल श्रद्धालुओं, पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
